
1.1.69 | Ramcharitmanas
जस बरु मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीं। मिलहि उमहि तस संसय नाहीं।। जे जे बर के दोष बखाने। ते सब सिव पहि मैं अनुमाने।।
Shri Ram Charit Manas - Sanskrit Documents
जस बरु मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीं। मिलहि उमहि तस संसय नाहीं ॥ जे जे बर के दोष बखाने। ते सब सिव पहि मैं अनुमाने ॥
Ram Charit Manas -Baal Kand (35) - राम चरित मानस
जस बरु मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीं। मिलहि उमहि तस संसय नाहीं।। जे जे बर के दोष बखाने। ते सब सिव पहि मैं अनुमाने।।
बाल कान्ड | श्री रामचरित मानस
Jul 24, 2006 · जस बरु मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीं। मिलहि उमहि तस संसय नाहीं।। जे जे बर के दोष बखाने। ते सब सिव पहि मैं अनुमाने।।
रामचरितमानस बालकाण्ड चौपाईयाँ पाठ | Bal Kand in Hindi
Oct 7, 2014 · जस बरु मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीं। मिलहि उमहि तस संसय नाहीं।। जे जे बर के दोष बखाने। ते सब सिव पहि मैं अनुमाने।।
Uma's future - a blessing in disguise : Narad's consolation
जस बरु मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीं । मिलहि उमहि तस संसय नाहीं ॥१॥ जे जे बर के दोष बखाने । ते सब सिव पहि मैं अनुमाने ॥
बालकाण्ड - दोहा ६१ से ७० - TransLiteral Foundations
जस बरु मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीं । मिलहि उमहि तस संसय नाहीं ॥ जे जे बर के दोष बखाने । ते सब सिव पहि मैं अनुमाने ॥